सड़को में आयी दरार,  ओटू हेड पर 44 हजार क्यूसेक पानी पहुंचा। 

घग्गर का जलस्तर ओटू हेड पर 44 हजार क्यूसेक दर्ज किया गया है, जबकि इसकी डाउन स्ट्रीम में 40 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। पिछले 12 घंटों में पानी में 2 हजार क्यूसेक की बढ़ोतरी हो गई। हालांकि गुहला चीका में पानी कम होने के बाद भी सिरसा में पानी कम नहीं हो रहा। इसकी वजह है कि सिरसा में छोटे बांध जो टूटे थे, वह पानी खेतों से घूमकर फिर से नदी में आ रहा है। 

शहर को बचाने के लिए हो रहा है बांध का निर्माण

सिरसा के घग्गर किनारे गांव बुर्जकर्मगढ़, पनिहारी, मुसााहिबवाला, फरवाई गांव की ढाणियां डूबी हुई है। इन गांवों के तीन और घग्गर का मुख्य बांध लगता है। जबकि एक ओर सिरसा-सरदूलगढ़ हाईवे। सिरसा-सरदूलगढ़ रोड के नीचे से गुजरने वाली पुलिया के बंद होने के कारण इन गांवों से नहीं निकल पा रहा।

किसानो ने लगाया पूरा जोर –

सिरसा शहर के आस पास के सभी गांव जो घग्गर नदी के किनारे आते है वहां के सारे किसानो ने बांध बनाने के लिए दिन रात एक कर रखा है। सभी रात व दिन दोनों समय घग्गर नदी के किनारो पर कड़ा पहरा दे रहा है। प्रशासन व समाज सेवी संस्थाए भी अपना पूरा योगदान दे रही है। वही गांव खेरेका से चामल तथा झोरड़नाली की तरफ स्थिति बहुत गंभीर बनी हुई है।

अगर इसी तरह की परिस्थिति बनी रही तो जल्दी ही पानी सिरसा शहर में आ जायेगा।

मौसम विभाग ने दी भारी बारिश की चेतावनी :-

हरियाणा में कल से 5 जिलों में बारिश की संभावना जताई गयी है। मौसम विभाग के मुताबिक पंचकूला, करनाल, यमुनानगर, कुरूक्षेत्र और कैथल जिलों में पूरे जोरो के साथ भारी बारिश होने की आशंका है। राज्य के दक्षिण और दक्षिण पूर्व जिलों के साथ पश्चिम और दक्षिण पश्चिम जिलों में भी मध्यम से हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है। आने वाले दिनों में भारी बारिश की वजह से घग्गर में पानी का स्तर और भी बढ़ने की संभावना है।

आइये  जानते है घग्गर नदी का इतिहास :- 

घग्गर नदी, जिसे घग्गर-हकरा नदी के नाम से भी जाना जाता है, उत्तरी भारत और पूर्वी पाकिस्तान में एक मौसमी नदी है। यह भारतीय उपमहाद्वीप की प्रमुख नदियों में से एक है, लेकिन इसे अक्सर “खोई हुई नदी” कहा जाता है क्योंकि यह वर्ष के अधिकांश समय सूखी रहती है और केवल मानसून के मौसम के दौरान पानी लाती है।

घग्गर नदी के बारे में मुख्य बातें:

भौगोलिक सीमा: घग्गर नदी भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य में शिवालिक पहाड़ियों से निकलती है और पाकिस्तान में प्रवेश करने से पहले भारत में पंजाब और हरियाणा राज्यों से होकर बहती है।

प्राचीन सभ्यता: घग्गर नदी हिंदू धर्म के सबसे पुराने पवित्र ग्रंथों में से एक, ऋग्वेद में वर्णित प्राचीन सरस्वती नदी से जुड़ी है। ऐसा माना जाता है कि प्राचीन वैदिक काल में सरस्वती नदी घग्गर-हकरा के समान प्रवाह में बहती थी।

लुप्त होती नदी: घग्गर नदी एक मौसमी धारा है, और इसका प्रवाह अत्यधिक मानसूनी वर्षा पर निर्भर है। मानसून के मौसम के दौरान, नदी काफी बढ़ सकती है, लेकिन शेष वर्ष में, यह अक्सर सूख जाती है, जिससे नदी का तल सूखा रह जाता है।

ऐतिहासिक महत्व: माना जाता है कि घग्गर-हकरा नदी घाटी सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान एक महत्वपूर्ण क्षेत्र रही है, जो लगभग 3300 ईसा पूर्व की दुनिया की सबसे प्रारंभिक शहरी सभ्यताओं में से एक है। इसके किनारे कालीबंगन और बनावली जैसे कई पुरातात्विक स्थल खोजे गए हैं।

वर्तमान स्थिति: सदियों से, घग्गर नदी का मार्ग बदल गया है, और यह अब उतनी शक्तिशाली नदी नहीं रही जितनी प्राचीन काल में थी। आज, व्यापक सिंचाई और कृषि प्रयोजनों के लिए जल निकासी के कारण, नदी का प्रवाह कम हो गया है, और यह अब अरब सागर तक नहीं पहुंचती है।

घग्गर नदी और इसका ऐतिहासिक महत्व क्षेत्र की सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत के महत्वपूर्ण पहलू हैं, जो भारतीय उपमहाद्वीप के प्राचीन इतिहास में बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *